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माझी शाळा निबंध मराठी मध्ये

माझी शाळा निबंध मराठी मध्ये, निक्की बोली शुक्र है, आपने मुझे दोस्त तो माना. वरना तो मुझे लगता था कि, आपके दोस्तो मे मेरा नाम ही नही है. मेहुल बोला तुझसे किसने कहा कि मैने तुझे ये मोबाइल गिफ्ट किया है. मैने तो तुझे बस इस मोबाइल का सिम कार्ड गिफ्ट किया है.

मैं बोला नही यार, मैं घर मे हूँ. लेकिन मुझे तुमसे एक ज़रूरी काम आ गया है. क्या तुम आज रात भी टॅक्सी चला रहे हो. मैं बोला छोटी माँ, दोबारा कभी अपने मरने की बात मत करना. मेरे लिए आप से बढ़कर दुनिया मे कुछ भी नही है. यदि आप ही ना रही तो, मैं जी कर क्या करूगा.

सेठ के जाने के बाद एक लड़की ने मुझे समझाया कि यदि तुम्हे उनकी क़ैद से बाहर निकलना है. तब तुम्हे उनकी बात मान लेनी चाहिए. क्योकि ऐसे तो तुम कभी बाहर नही निकल पाओगी. जबकि यदि तुम उनकी बात मान लेती हो तो, कभी ना कभी तुम्हे उनकी क़ैद से छूटने का मौका मिल ही जाएगा. माझी शाळा निबंध मराठी मध्ये मैं बोला मैने तुझसे पहले ही कहा था कि तुझे खिलाना है तो मेरी गोद मे ही बैठ कर खिलाना होगा नही तो मुझे नही खाना है.

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  1. खाना लग चुका था. लेकिन किसी ने खाना खाना शुरू नही किया था. सब को जैसे किसी बात का इंतजार हो. सब मेरी तरफ ही देख रहे थे और मैं सब के खाना शुरू करने का इंतजार कर रहा था. फिर अचानक रिया ने निक्की को कोहनी मारी. जिस से निक्की ने रिया को पलट कर देखा.
  2. मौसी की गोद मे मैने होश संभाला था. वो अच्छे से जानती थी कि, मैं झूठी कसम नही ख़ाता. इसलिए फिर उन ने मुझसे खाने के लिए ज़िद नही की और प्यार से मेरे सर पर हाथ फेरने लगी. डॉग के साथ सेक्सी फिल्म
  3. मैं अभी उसको कुछ और बकने वाला था. लेकिन वो बिना मेरा जबाब सुने ही वापस चला गया. शायद उसे सच मे नींद आ रही थी. मेहुल के जाते ही निक्की ने मुस्कुराते हुए पुछा. मैं बोला जैसी तेरी मर्ज़ी. तुझे यदि इसी मे खुशी मिल रही है तो, अब मैं तुझे नही रोकुगा. लेकिन अब तू फोन रख और मुझे ज़रा सोचने दे.
  4. माझी शाळा निबंध मराठी मध्ये...मगर मेरा मूड कीर्ति का कॉल बिज़ी रहने की वजह से खराब था और मैं चाहता था कि, मेहुल जल्द से जल्द अपनी बात ख़तम करके कॉल रखे. लेकिन वो तो नितिका और शिल्पा के बारे मे सुनकर बावला सा हो गया और मुझसे सवाल पर सवाल सवाल करने लगा. कीर्ति बोली ओके मैं भी कसम खाती हूँ कि, जब तक तुम मेरी जान को कोई तकलीफ़ नही पहुचाओगे. तब तक मैं भी तुम्हारी जान को कोई तकलीफ़ नही पहुचाउन्गी.
  5. पद्मिएनी भी मेरी बात से सहमत हो गयी. अगले दिन आकाश आया और हम उसे लेकर डॉक्टर के पास गये. डॉक्टर ने वही किया जो हम से कहा था. डॉक्टर से मिलने के बाद आकाश के मन मे ठीक होने की एक उम्मीद जाग गयी. जो उसके चेहरे से साफ झलक रही थी. अपनी बात बोलकर मैं प्रिया का चेहरा देखने लगा. मुझे नही मालूम था कि, मेरे इस सच को जानने के बाद प्रिया की क्या प्रतिक्रिया रहेगी. वो इस सच को जानकार मुझसे नाराज़ होती है या फिर पहले की ही तरह बात करती है.

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मैं बोला थॅंक, और हो सके तो, अपना मोबाइल अपने पास ही रखिएगा. हो सकता है कि, मुझे आपसे कोई ज़रूरी बात करना पड़ जाए.

निमी बोली मुझे तो ये सब बहुत पसंद है. मगर कल मेरे पेट मे दर्द था, जिस वजह से ये सब नही खाया था. लेकिन आज मेरा पेट दर्द सही है, इसलिए खा रही हू. मैने अपने होंठ उसके गालों पर रख दिए. मैं थोड़ी देर उसके गालों को बड़े प्यार से चूमता रहा और उसके बालों पर हाथ फेरता रहा. फिर जैसे ही मैं पिछे हटा. वो हो गया, जो मैने सोचा भी नही था.

माझी शाळा निबंध मराठी मध्ये,रिया बोली तुम कैसे भाई हो. एक तरफ कहते हो कि, तुम्हे निमी की तकलीफ़ ज़रा भी सहन नही होती. दूसरी तरफ उसको कॉल ना लगा कर, उल्टे उसके कॉल आने का इंतजार कर रहे हो. तुम खुद ही उसे कॉल लगा कर बात क्यों नही कर लेते.

नितिका बोली अरे भैया आप, मैं तो समझी थी कि, आप लोग शाम के बाद ही वापस आएगे. लेकिन आप लोग तो बहुत जल्दी ही वापस आ गये.

कीर्ति की बात सुनकर, छोटी माँ को, सुबह कीर्ति से कही गयी, अपनी बात याद आ गयी. लेकिन वो तो खुद मेरी वजह से घर वापस जा रही थी. ऐसे मे वो मुझे वहाँ रुकने के लिए कैसे कह सकती थी.सेक्स बीएफ सेक्स बीएफ सेक्सी

कीर्ति :- मुझे कुछ मालूम नही.. मुझे क्या हुआ था.. बस इतना याद है कि.. मुझे तुम पर बहुत प्यार आ रहा था.. राज बोला ओके मैं जाता हूँ. लेकिन यदि तुम्हे रात को यहाँ कोई परेशानी हो तो, तुम मुझे कॉल कर देना. मैं आ जाउन्गा. रात को नीचे की कॅंटीन खुली रहती. तुम को यदि चाय कॉफी पीना हो तो, तुम नर्स को बता कर चले जाना. अब मैं जाता हूँ.

दोस्तो! नियति के खेल बड़े अजीब होते हैं। आदमी अपने आप को कितना भी गुरु घंटाल या बुद्धिमान समझे भविष्य में क्या होगा कोई नहीं जानता। आगरा तक मैं भी मधुर के साथ गया और उन दोनों को एअरपोर्ट छोड़कर मैं वापस आ गया। मैंने मधुर को गले लगाकर विदा किया।

मैं सोचने लगा कि, ये तो मेरे सामने ही सो गया था. फिर इसने नामिता के रोने की आवाज़ कैसे सुन ली. कहीं ये साला रात को छ्होटी माँ के कमरे के चक्कर तो नही लगा रहा था.,माझी शाळा निबंध मराठी मध्ये मैंने उसे अपने पास बुलाया और पूछा. मैंने उसे अपने पास आने का इशारा किया तो, वो मेरे पर आकर बैठ गयी. मैंने प्यार से उसके सर पर हाथ फेरते हुए, उस से पुछा.

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